Haryana politics

Devendra Babli preparing to shock JJP, what is the meaning of the post on X account?

Haryana Politics : JJP को झटका देने की तैयारी में देवेंद्र बबली, X अकाउंट पर पोस्ट के मायने आखिर क्या ?

Haryana Politics : हरियाणा में लोकसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचलें तेज हो गई है। ऐसे में कई नेता अब तक कई पार्टियों को अलविदा कह चुके हैं। टिकट नहीं मिलने के संशय को लेकर दिग्गज नेता भी पार्टियों का दामन छोड़ अन्य दूसरी राजनीतिक पार्टियों में शामिल होने का मन बनाते नजर आ रहे हैं।

 

 

वहीं पूर्व मंत्री एवं टोहाना से JJP विधायक देवेंद्र सिंह बबली ने प्लैटफॉर्म X पर लिखा है कि बेड़ियों से आज़ाद होने का रास्ता साफ हो गया है। अब देवेंद्र बबली की इन पंक्तियों का राजनीतिक (Haryana Politics) विशेषज्ञों से भावार्थ समझने की कोशिश करेंगे तो पाएंगे कि ये बेड़ियां जजपा की हैं।

जिसमें वो पिछले 5 वर्षों से बंधे हुए हैं। लेकिन अब विधानसभा चुनावों (Haryana Politics) से ठीक पहले वो इन बेड़ियों को तोड़कर ना सिर्फ जजपा से मुक्ति पाना चाह रहे हैं। बल्कि आने वाले वक्त में उल्टा जजपा के लिए ही चुनौती बनने के लिए भी तैयार है। हालांकि ये सिर्फ कयास हैं। अब अपनी पोस्ट के बारे में ज्यादा जानकारी तो टोहाना से विधायक देवेंद्र सिंह बबली ही दे सकते हैं।

 

 

 

बता दें कि 2019 हरियाणा विधानसभा चुनावों (Haryana Politics) से पहले देवेंद्र बबली ने खफा होकर कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और दुष्यंत चौटाला की उस वक्त की नई नवेली पार्टी से टोहाना का टिकट भी हासिल कर लिया और बीजेपी के दिग्गज नेता सुभाष बराला को चुनावों में पटकनी भी दी।

 

लेकिन पिछले कुछ वक्त से देवेंद्र बबली का रुझान भाजपा की तरफ बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। अब देखना दिलचस्प रहेगा कि क्या देवेंद्र बबली बेड़ियों से मुक्ति पाने के बाद कमल थामते हुए नजर आते हैं या नहीं। आपको क्या लगता है कि पूर्व पंचायत मंत्री देवेंद्र बबली (Haryana Politics) क्या करेंगे कमेंट बॉक्स में लिखकर बताएं।

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Ranjeet chautala ; बिजली मंत्री रणजीत चौटाला का विधायक पद से इस्तीफा मंजूर नहीं, जांच होगी, स्पीकर ने दिया ये बयान

Ranjeet Chautala : भाजपा में शामिल हुए रानियां से निर्दलीय विधायक रणजीत सिंह का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है। विधानसभा की ओर से अभी पहुंचे इस्तीफे का सत्यापन किया जाएगा कि क्या उन्होंने ही इस्तीफा भेजा है। इसलिए एक बार उन्हें विधानसभा बुलाया जाएगा। रणजीत सिंह 24 मार्च को भाजपा में शामिल हुए थे। उसी दिन उन्हें भाजपा ने हिसार से लोकसभा की टिकट देकर चुनाव मैदान में उतार दिया था। इसके बाद उन्होंने अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है। हालांकि, वे अभी भी मंत्री पद पर बने हुए हैं।

इस मामले में विधानसभा स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता का कहना है कि रणजीत सिंह का इस्तीफा भाजपा ज्वॉइन करने से पहले आ गया था। इस्तीफा उन्होंने खुद आकर नहीं दिया। इसलिए यह सत्यापित किया जाएगा कि इस्तीफा उन्होंने ही भेजा है या नहीं। इसलिए एक बार उन्हें बुलाकर इस्तीफा सत्यापित कराया जाएगा। उसके बार आगे की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

ये कहते हैं एक्सपर्ट
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार का कहना है कि रणजीत सिंह 24 मार्च को भाजपा में शामिल हुए। दल बदल विरोधी प्रावधान के अनुसार यदि विधायक किसी पार्टी में शामिल होता है तो उसकी विधानसभा की सदस्यता खत्म हो जाती है। एडवोकेट का कहना है कि वे मंत्री पद पर बने हुए हैं। रणजीत सिंह चौटाला के मामले में उनकी अधिकतम 6 महीने तक मंत्री बने रहने की उपरोक्त अवधि उनके विधायक पद से दिए गए त्यागपत्र के स्वीकार होने की तारीख से ही शुरू होगी।

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